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Neem Ke 10 Benefits In Hindi: नीम के पत्ते के फायदे इन हिंदी, जानिए नीम के बारे में सबकुछ।

Neem ke Patte ke Fayde
Neem ke 10 Benefits In Hindi.

स्वस्थ एवं सुंदर जीवन के लिए नीम की पत्तियों का आयुर्वेदिक महत्त्व।

आपको बता दें कि नीम के पेड़ का हर अंग उपयोगी होता है, चाहे उनके पत्ते हो या चाहे उनके छली या फिर उनके फूल जिसे सब्जी बनाकर खाया जाता हैं। उनके फल से नीम के तेल बनाता हैं जिसे आयुर्वेद में बहुत महत्त्वपूर्ण माना गया हैं।

चिकित्सा साहित्य में नीम के पेड़ को जीवन की खुशहाली के लिए एक औषधि के रूप में देखा जाता है, इस वजह से नीम के पेड़ को दुनिया में एक मजबूत स्थान प्राप्त है।

नीम के पौधे के हर हिस्से का उपयोग विभिन्न संक्रामक रोगों के खिलाफ उपयोग में लाया जाता हैं। अगर नीम की टहनियों का नियमित रूप से उपयोग किया जाए तो यह मसूड़े की सूजन, दांतों में कैविटी और दांतों की सड़न जैसी दंत समस्याओं को रोकने में मदद करती है।

नीम की छाल या पत्तियों को लगाने पर मुंहासे, दाने, त्वचा पर चकत्ते और त्वचा की एलर्जी जैसी त्वचा की विभिन्न समस्याओं को प्रभावी ढंग से ठीक करने के लिए जाना जाता है। इन सभी समस्याओं के लिए यह बेहद कारगर है। इसका उपयोग सोरायसिस, एक्जिमा और दाद संक्रमण के लक्षणों को कम करने के लिए भी किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि प्रतिदिन भोजन के बाद एक नीम की गोली लेना मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।

सिर की जूँओं से छुटकारा पाने के लिए नीम का तेल लगाया जा सकता है और यह मधुमेह के रोगियों में घावों (जैसे मधुमेह अल्सर) को ठीक करने में भी मदद करता है। कुछ मामलों में, अनुशंसित खुराक से अधिक लेने पर नीम के उत्पाद उल्टी, दस्त और त्वचा की एलर्जी का कारण बन सकता है।

नीम के उत्पाद के जानकार के अनुसार गर्भावस्था के दौरान नीम के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात होने की संभावना बड़ जाती हैं।

1.नीम के 10 फायदे। Neem ke 10 fayde जो आपको जानना चाहिए।

Neem Ke 10 Benefits In Hindi
Neem Ke 10 Benefits In Hindi

i) नीम की पत्तियाँ त्वचा की सुंदरता बढ़ाती हैं।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियों को चेहरे पर लगाने से त्वचा की खूबसूरती बढ़ती है और त्वचा चमकने लगती है। नीम की पत्तियों में रक्त शुद्ध करने के अच्छे गुण होते हैं और मुँहासे, एक्जिमा और त्वचा पर चकत्ते जैसी त्वचा की समस्याओं के जोखिम को कम करते हैं।

ii) नीम की पत्तियाँ बालों को पोषण देती हैं।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियाँ बालों को पोषण देती हैं। नीम के औषधीय गुणों के कारण, नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं, जिसके कारण यह रक्त शोधक के रूप में काम करता है और त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करता है। विभिन्न समस्याओं को नियंत्रित करता है।

iii) नीम की पत्तियों से दांतों को सुरक्षा प्रदान करना।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियाँ दांतों की सुरक्षा में बहुत मददगार होती हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि नीम में सूजन-रोधी गुण होते हैं, इसलिए यह मुंह और दांतों में सूजन और अन्य समस्याओं को ठीक करने का काम करता है।

iv) घावों को ठीक करने में मदद करता है।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियाँ घावों को भरने में मदद करती हैं। आधुनिक विज्ञान के नजरिए से शोध से यह पता चला है। नीम में सूजन-रोधी गुण होते हैं। इससे घाव बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं।

v) सूजन को कम करने का काम करता है।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियों में तिक्त (कड़वा) और कृमिनाशक गुण होते हैं और यह शरीर में किसी भी संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए रोगाणुरोधी के रूप में काम करते हैं।

vi) पित्त को संतुलित करता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखा गया है कि पित्त को संतुलित करने में नीम की पत्तियों की अहम भूमिका होती है। नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं, जिसके कारण यह रक्त शोधक के रूप में काम करता है और पित्त को कम करने में मदद करता है और पित्त को संतुलित और नियंत्रित करता है।

vii) वात को बढ़ाता है जो आंखों के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।

ऐसा माना जाता है कि नीम की पत्तियाँ वात को बढ़ाती हैं, जो आंखों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं। पत्तियों में रक्त शुद्ध करने के अच्छे गुण होते हैं और इसलिए इन्हें आंखों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

viii) पेट के कीड़ों को मारता है और स्वस्थ रखता है।

ऐसा माना जाता है कि नीम से लिया गया कोई भी उत्पाद तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) होता है यह शरीर में किसी भी संक्रमण को ठीक करता है। कृमिनाशक गुणों के कारण परजीवी कृमियों के खतरे को कम कर सकता है। यह परजीवियों की गतिविधि को दबाता है और उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

ix) यह पाचन को बेहतर बनाने का काम करता है।

ऐसा माना जाता है कि बेहतर पाचन के लिए नीम की पत्तियाँ पाचन तंत्र के लिए अच्छी होती हैं। नीम की पत्तियाँ लीवर के बेहतर कामकाज में मदद करती हैं और आपके पाचन में सुधार करती हैं। रोजाना नीम चबाने से आपके पाचन तंत्र के सभी बैक्टीरिया मर जाते हैं और आपका पाचन मजबूत होता है।

x) यह प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में काम करता है।

नीम की पत्तियों में प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर होता हैं इनके 7-8 नीम की पत्तियों को 2 सप्ताह तक चबाएँ या 2-3 सप्ताह तक 10-15 मिलीलीटर नीम का रस पियें तो माना जाता हैं कि यह प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर करता हैं।

3.एलर्जी में नीम के फायदे।

आधुनिक विज्ञान दृष्टिकोण माना गया कि नीम में बहुत सारे फायदे बताये गए हैं मैं कुछ एलर्जी में नीम के फायदे बता रहा हूँ।

i) नीम में तिक्त (कड़वा) और कृमिनाशक गुण होते हैं और यह शरीर में किसी भी संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए रोगाणुरोधी के रूप में काम करता है।

ii) नीम में तिक्त (कड़वा) और कृमिनाशक गुण होते हैं और यह शरीर में कीड़ों की वृद्धि को रोकने के लिए कृमिनाशक के रूप में काम करता है।

iii) नीम की पत्तियों में मौजूद एजाडिरेक्टिन नामक पदार्थ अपने कृमिनाशक गुणों के कारण परजीवी कृमियों के खतरे को कम कर सकता है। यह परजीवियों की गतिविधि को दबाता है और इस प्रकार उन्हें आपके शरीर से खत्म करने में मदद करता है।

iv) नीम में मौजूद कुछ तत्वों में मलेरिया रोधी गुण होते हैं। ये मलेरिया परजीवियों की वृद्धि को रोककर मलेरिया के मामलों में मदद कर सकते हैं।

4.सुबह खाली पेट नीम के पत्ते खाने के फायदे।

यह आम तौर पर देखा गया कि नीम के पत्ते को खाने से मुह कड़वा लगता हैं परंतु यह बहुत फायदेमंद होता हैं सुबह खाली पेट नीम के पत्ते खाने के फायदे ये बहुत सारे लाभ हो सकते हैं नीचे कलाम में पढ़ें और जाने।

i) भारत नहीं पूरे विश्व में आज खराब लाइफस्टाइल के चलते डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है तो नीम के पत्ते को आधुनिक विज्ञान दृष्टिकोण से रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है।

डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से उपयोग करने पर डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता हैं। नीम की पत्तियों में मौजूद निम्बिनिन रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।

ii) ऐसा माना जाता है कि सुबह खाली पेट नीम की पत्तियाँ खाने से खून साफ होता है। यह बात मैं आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कह रहा हूँ। नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं, इसलिए यह रक्त शोधक के रूप में काम करता है। त्वचा की विभिन्न समस्याओं पर काम करता है और उन्हें नियंत्रित करता है।

iii) सुबह खाली पेट नीम के पत्ते खाने से पेट के लिए बहुत फायदेमंद माना गया हैं नीम अपने तिक्त (कड़वा) और अमा (अनुचित पाचन के कारण शरीर में विषाक्त अवशेष) को हटाकर उच्च रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है जो चयापचय में सुधार करने में मदद करता है। नीम सिर्फ हमारी त्वचा के लिए ही नहीं बल्कि पेट के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है।

iv) सुबह खाली पेट नीम के पत्ते खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में फायदेमंद माना गया हैं नीम के पेड़ के कई उपयोग हैं जिनमें इसकी छाल और पत्तियाँ भी शामिल हैं।

नीम की पत्तियों में कई तरह के विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, इसका उपयोग सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।

 5.नीम के औषधीय उपयोग।

नीम के औषधीय उपयोग के बारे में ऊपर कलाम में हम आपको बताये हैं परंतु उनके बावजूद आप नीम के औषधीय उपयोग के बारे में नीचे जान ले।

i) त्वचा से जुड़ी समस्या़ओं या घाव के लिए नीम पाउडर को अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिक्सय करके औषधीय उपयोग किया जा सकता हैं। नीम में एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं।

ii) यदि आपको खुजली या कोई इनफेकसहन लग रहा हैं तो नीम के पत्ते को गर्म पनि के साथ मिलाकर नहाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हैं।

iii) यह बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। डैंड्रफ के समस्या को ठीक करता हैं ऊपर कॉलम में यह बताया गया है कि यह बालों की समस्याओं को कैसे ठीक करता है। डैंड्रफ के लिए नीम के पत्ते को पानी के साथ उबालकर ठंडा कर लें और कुछ समय बाद बाल धोने के लिए उपयोग करे।

iv) आजकल हाथ साफ करने के लिए नीम के पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब हाथों में कीटाणु या बैक्टीरिया नहीं होंगे तो बीमार होने की संभावना कम होगी। इसका उपयोग एनल फिस्टुला या बवासीर में सिट्ज़ बाथ के लिए भी किया जा रहा है।

6.सुबह खाली पेट नीम के पत्ते खाने के नुकसान।

नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं और यह गुण इसकी पत्तियों में भी मौजूद होता है। सुबह खाली पेट नीम की पत्तियां चबाने से बहुत फायदेमंद माना गया है, लेकिन किसी भी चीज का अधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

हैं इसीप्रकार बहुत अधिक नीम की पत्तियों का सेवन करने से मतली या पेट में जलन हो सकती है। दरअसल, नियमित रूप से नीम का जूस पीने से न सिर्फ पेट साफ होता है बल्कि मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।

लेकिन जब आप इसे अधिक मात्रा में लेंगे तो यह अधिक फैट बर्न करेगा और खाली पेट आपको सीने में जलन, मतली आदि जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

7.Neem Ke Patte के नुकसान, दुष्प्रभाव और साइड इफेक्ट्स।

Neem Ke Patte के दुष्प्रभावों, Side Effects बहुत कम हैं परंतु कुछ लोगाँ के लिए इनके उपयोग को सावधानीय बरती जरूरी हो जाता हैं। हम आपको नीचे इनके साइड इफेक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं, कृपया उन्हें पढ़ें।

i) नीम की पत्तियों के कई उपयोग हैं, यदि आप इसका सेवन अधिक मात्रा में खाली पेट कर लेते हैं तो आपके लिए बहुत हानिकारक भी है। इसीप्रकार बहुत अधिक नीम की पत्तियों का सेवन करने से मतली या पेट में जलन हो सकती है।

ii) ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस, ल्यूपस (सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस) और रुमेटीइड गठिया में प्रतिरक्षा प्रणाली अति सक्रिय होती है। ऐसे में नीम का सेवन करने से लक्षण बढ़ सकते हैं। इसलिए ऑटो-इम्यून बीमारियों की स्थिति में नीम से परहेज करें।

iii) कुछ अध्ययनों के अनुसार, नीम शुक्राणु को नुकसान पहुँचा सकता है और गर्भधारण की संभावना को कम कर सकता है। इसलिए, अगर आप बांझपन का इलाज करा रहे हैं या बच्चा पैदा करने की योजना बना रहे हैं तो नीम से परहेज करें।

iv) नीम सर्जरी के दौरान और बाद में रक्त शर्करा के स्तर में हस्तक्षेप कर सकता है। इसलिए, निर्धारित सर्जरी से कम से कम 2 सप्ताह पहले नीम का सेवन बंद करना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

v) हृदय रोग के रोगियों के लिए आधुनिक विज्ञान के दृष्टिकोण से, नीम की पत्ती का जहर वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन का कारण बन सकता है। नीम की पत्ती का अर्क ब्रैडीकार्डिया (धीमी हृदय गति) , हृदय गति असामान्यताएँ या निम्न रक्तचाप का कारण भी बन सकता है, इसलिए उपयोग करने से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।

vi) ऐसा माना जाता है कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, नीम के तेल का उपयोग हमेशा चिकित्सकीय देखरेख में किया जाना चाहिए। नीम के तेल के किसी भी दुष्प्रभाव को कम करने के लिए आप सेंधा नमक, घी और गाय के दूध का उपयोग कर सकते हैं।

vii) जिन लोगों को नीम या इसके घटकों से एलर्जी है, उन्हें डॉक्टर की देखरेख में नीम का उपयोग करना चाहिए।

viii) वैज्ञानिक प्रमाण की कमी के कारण स्तनपान के दौरान नीम के औषधीय उपयोग से बचना चाहिए।

निष्कर्ष:

स्वस्थ और सुंदर जीवन के लिए नीम की पत्तियों का आयुर्वेदिक महत्त्व है। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानता है कि नीम के अनेक फायदे हैं। नीम में तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला) गुण होते हैं, जिसके कारण यह शरीर में फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ बहुत प्रभावी माना जाता है।

आप अपनी स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी नीम का सेवन कर सकते हैं। आशा है आपको यह जानकारी पसंद आयी होगी। कृपया इस आर्टिकल को शेयर और लाइक करें और कमेंट भी करें। स्वास्थ्य से जुड़े ऐसी ही लेख पढ़ने के लिए रीफे न्यूज़ से हमसे जुड़ें।

S.K.Yadav cg
S.K.Yadav cg
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